समान काम, समान वेतन : सुप्रीम कोर्ट की सलाह से बिहार में शिक्षकों को जगी उम्मीद…

लाइव सिटीज डेस्क : समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर बिहार में नियोजित ​शिक्षक लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं. इसके लिए एक माह से नियोजित शिक्षकों का आंदोलन चल रहा है. मैट्रिक व इंटरमीडिएट की कॉपी का मूल्यांकन बाधित है. उधर समान काम के लिए समान वेतन पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ऐसी सलाह दी है, जिससे बिहार के नियोजित शिक्षकों में उम्मीद जगी है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि समान काम के लिए समान वेतन पर सरकार विचार करे.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआइएसएफ आदि केंद्रीय पुलिस संगठनों के अफसरों को समान काम के लिए समान वेतन देने पर विचार करे. याचिका कुछ अफसरों की ओर से दायर की गयी है. न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हमारा मानना कि अगर वित्तीय मदद से इन प्रतिवादियों की समस्या का अंत हो सकता है तो सरकार को इस पर फिर से विचार करना चाहिए. इस मामले में अगली सुनवाई आठ अगस्त को होगी. हालांकि यह सलाह केंद्र को दी गयी है, लेकिन इससे बिहार के नियोजित शिक्षकों में उम्मीद जगी है. गौरतलब है कि बिहार में नियोजित शिक्षक समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर अंतिम लड़ाई लड़ रहे हैं. उनका आंदोलन तो चल ही रहा है, इसी मामले को लेकर पटना हाइकोर्ट में भी मामला चल रहा है. शिक्षकों का कहना है कि उन्हें बिहार सरकार समान काम के लिए समान वेतन दे. समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर सबसे पहले मुंगेर के हवेली खड़गपुर स्थित बनहरा स्कूल के टीचर उपेंद्र राय पटना हाइकोर्ट में याचिका दायर की. इसके बाद 13 अन्य मामले दायर किये गये. सभी मामलों की सुनवाई एक साथ हो रही है.

शिक्षकों ने बताया कि पटना हाइकोर्ट में पिछली सुनवाई 10 अप्रैल को हुई है. इसमें सरकार की ओर से 15 दिन का समय मांगा गया है. इसके ​पहले भी बिहार सरकार की ओर से कई बार डेट मांगी गयी थी, लेकिन समय पर उसकी ओर से हैफिडेविट नहीं जमा कराया गया. बताया जाता है कि 10 अप्रैल को सुनवाई में कोर्ट ने सरकार को अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया गया है. बता दें कि नियोजित शिक्षक समान काम और समान वेतन की मांग को लेकर पिछले एक माह से आंदोलन कर रहे हैं. वे 15 मार्च से इंटरमीडिएट के मूल्यांकन कार्य को बाधित किये हुए हैं, साथ ही एक सप्ताह से मैट्रिक के मूल्यांकन कार्य का भी बहिष्कार कर दिया गया है. इससे समय पर रिजल्ट के निकलने को लेकर आशंका व्यक्त की जा रही है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई में कहा है कि बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआइएसएफ, आइटीबीपी, एसएसबी आदि के अफसरों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.

सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि इन अधिकारियों की मुख्य समस्या समान काम के लिए समान वेतन न मिलना है. ये अधिकारी इससे महरूम हैं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और इंडियन पुलिस सर्विस सेंट्रल एसोसिएशन द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा चार दिसंबर, 2012 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है. अगली सुनवाई आठ अगस्त को होगी. उधर बिहार नियोजित शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस सलाह को भी अपने मामले में हमलोग आधार बनायेंगे.


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