7वीं और 8वीं के शिक्षकों ने जांची मैट्रिक परीक्षा की कॉपियां, अब लटकी तलवार!

बिहार बोर्ड के द्वारा माध्यमिक शिक्षकों की हड़ताल के कारण मध्य विद्यालय के शिक्षकों से मैट्रिक की कॉपियों का मूल्यांकन करा लिया गया है. पर नियमों के अनुसार मैट्रिक की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए शिक्षकों के पास मैट्रिक या इंटर में कम से कम तीन साल पढ़ाने का अनुभव होना जरूरी है.

पर हर बार की तरह इस बार ऐसा कुछ भी नियमों के अनुसार नही हुआ हुआ. इस साल मैट्रिक परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए मिडिल स्कूल के वैसे शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य में लगाया गया है, जो सातवीं और आठवीं तक के छात्रों को पढ़ाते हैं.
इसके बाबत राम पुकार यादव द्वारा हाईकोर्ट में स्तरहीन मूल्यांकन की संभावना और खराब रिजल्ट की आशंका को लेकर एक रिट फाईल की गयी थी. जिसे लेकर न्यायमूर्ति चक्रधारीशरण सिंह की एकलपीठ ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से एक सप्ताह में वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया है.

हाईस्कूलों में नियुक्त्त नियोजित शिक्षकों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर वर्ष 2017 की मैट्रिक की परीक्षा की काॅपियों के मूल्यांकन बहिष्कार किया था. इसके कारण ही बिहार बोर्ड ने मूल्यांकन का कार्य मिडिल स्कूल के शिक्षकों से कराने का निर्णय लिया था. शिक्षा विभाग के उच्चस्तरीय निर्णय पर ही समिति कोई भी कदम उठाती है. कोर्ट ने संदर्भित नियमों के आलोक में बिहार बोर्ड को एक हफ्ते में जवाब दायर करने का आदेश दिया. अगली सुनवाई 8 मई को होगी.

Article Source ~ DBN 


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